ओ सदानीरा (जगदीशचंद्र माथुर) – वस्तुनिष्ठ प्रश्न
BSEB Class 12 Hindi Chapter 7
बिहार बोर्ड कक्षा 12वीं हिन्दी के अध्याय 7 'ओ सदानीरा' (जगदीशचंद्र माथुर) के सभी महत्वपूर्ण वस्तुनिष्ठ प्रश्न यहाँ दिए गए हैं।
• 'भोर का तारा', 'कोणार्क' जैसे नाटकों के रचयिता
• वैशाली महोत्सव के संस्थापक
• बिहार सरकार के सचिव पद पर सेवारत
ओ सदानीरा: पाठ का विस्तृत विश्लेषण एवं सांस्कृतिक महत्व
जगदीशचंद्र माथुर द्वारा लिखित निबंध 'ओ सदानीरा' हिंदी साहित्य का एक महत्वपूर्ण यात्रा-वृत्तांत है जो बिहार के चंपारण क्षेत्र की सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और सामाजिक विरासत को प्रस्तुत करता है। 'सदानीरा' शब्द का अर्थ है 'सदा बहने वाली नदी' और यह निबंध गंडक नदी को संबोधित है जो चंपारण क्षेत्र से होकर बहती है।
निबंध का केंद्रीय विषय: यह निबंध गंडक नदी के माध्यम से चंपारण क्षेत्र की सांस्कृतिक धरोहर, ऐतिहासिक घटनाओं, सामाजिक परिवर्तनों और प्राकृतिक सौंदर्य का चित्रण करता है। लेखक ने इस क्षेत्र की विविध संस्कृतियों - थारू, धाँगड़, और अन्य समुदायों के जीवन को बड़े ही मार्मिक ढंग से प्रस्तुत किया है।
ऐतिहासिक संदर्भ: निबंध में चंपारण सत्याग्रह (1917) का विशेष उल्लेख है जो महात्मा गांधी के नेतृत्व में हुआ था। इस आंदोलन ने न केवल भारतीय स्वतंत्रता संग्राम को नई दिशा दी बल्कि चंपारण के किसानों को 'तीनकठिया' प्रथा के शोषण से मुक्ति दिलाई।
सांस्कृतिक विविधता: चंपारण क्षेत्र विभिन्न जनजातियों और समुदायों का निवास स्थान रहा है। थारू समुदाय की कला, धाँगड़ समुदाय की मेहनत, और स्थानीय लोगों की सहजता इस निबंध में सजीव हो उठी है।
चंपारण क्षेत्र की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
भौगोलिक स्थिति: चंपारण बिहार राज्य के उत्तर-पश्चिमी भाग में स्थित है जो नेपाल की सीमा से लगा हुआ है। यह क्षेत्र अपनी उपजाऊ भूमि, नदी-घाटियों और वन संपदा के लिए प्रसिद्ध है। गंडक नदी इस क्षेत्र की मुख्य नदी है जो सदियों से यहाँ के जीवन और संस्कृति का आधार रही है।
ऐतिहासिक महत्व: चंपारण का ऐतिहासिक महत्व प्राचीन काल से है। यहाँ नंदनगढ़ का स्तूप (82 फुट ऊँचा) बौद्ध स्थापत्य कला का एक महत्वपूर्ण उदाहरण है। मध्यकाल में यहाँ राजा हरिसिंह देव का शासन था जिन्हें गयासुद्दीन तुगलक जैसे मुसलमान आक्रमणकारियों का सामना करना पड़ा।
स्वतंत्रता संग्राम में योगदान: 1917 का चंपारण सत्याग्रह भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन का एक निर्णायक मोड़ था। महात्मा गांधी ने यहाँ भितिहरवा और बड़हरवा में आश्रम विद्यालयों की स्थापना की जो शिक्षा और सामाजिक जागरण के केंद्र बने। इस आंदोलन में राजकुमार शुक्ल और पुंडलिक जी जैसे स्थानीय नेताओं की महत्वपूर्ण भूमिका थी।
सांस्कृतिक विविधता: चंपारण में थारू और धाँगड़ समुदायों की समृद्ध सांस्कृतिक परंपराएँ हैं। थारू समुदाय की कला मुख्यतः गृह-सज्जा और पात्रों में देखी जा सकती है, जबकि धाँगड़ समुदाय के लोग छोटा नागपुर से आकर यहाँ बसे थे और अपनी मेहनत से इस क्षेत्र के विकास में योगदान दिया।
जगदीशचंद्र माथुर: साहित्यिक योगदान एवं जीवन परिचय
जगदीशचंद्र माथुर (16 जुलाई 1917) हिंदी साहित्य के एक प्रमुख नाटककार, निबंधकार और साहित्यकार थे। उनका जन्म उत्तर प्रदेश के मैनपुरी जिले में हुआ था लेकिन उनका अधिकांश कार्यकाल बिहार में बीता जहाँ वे बिहार सरकार के सचिव पद पर सेवारत रहे।
शैक्षिक पृष्ठभूमि: माथुर जी ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से शिक्षा प्राप्त की और बाद में सरकारी सेवा में आ गए। उनकी साहित्यिक यात्रा छात्र जीवन से ही शुरू हो गई थी और उन्होंने विभिन्न विधाओं में लेखन कार्य किया।
प्रमुख रचनाएँ:
• नाटक: 'भोर का तारा' (1946), 'कोणार्क' (1951), 'शारदीया' (1959), 'पहला राजा' (1966)
• निबंध संग्रह: 'बोलते क्षण' (जिसमें 'ओ सदानीरा' संकलित है), 'कुछ और निबंध'
• यात्रा वृत्तांत: 'दूसरी दुनिया'
• आलोचना: 'रंगमंच के सिद्धांत और व्यवहार'
सांस्कृतिक योगदान: जगदीशचंद्र माथुर ने 'वैशाली महोत्सव' के बीजारोपण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। यह महोत्सव प्राचीन वैशाली गणराज्य की स्मृति में मनाया जाता है और बिहार की सांस्कृतिक पहचान का हिस्सा बन गया है।
लेखन शैली: माथुर जी की भाषा-शैली स्पष्ट, प्रवाहमय और प्रभावशाली है। उनके निबंधों में ऐतिहासिक तथ्यों का सूक्ष्म विश्लेषण, सांस्कृतिक विवरणों की सजीवता और सामाजिक चिंतन की गहराई स्पष्ट झलकती है। 'ओ सदानीरा' में उन्होंने चंपारण क्षेत्र का इतना सजीव चित्रण प्रस्तुत किया है कि पाठक स्वयं को उस वातावरण में पहुँचा हुआ महसूस करता है।
• धाँगड़ समुदाय का परिश्रम
• नंदनगढ़ का स्तूप (82 फुट ऊँचा)
• गांधी के आश्रम विद्यालय
• वैशाली महोत्सव की परंपरा
'ओ सदानीरा' निबंध के प्रमुख विषय एवं संदेश
1. प्रकृति और मानव का संबंध: निबंध में गंडक नदी के माध्यम से प्रकृति और मानव के अटूट संबंध को दर्शाया गया है। नदी यहाँ केवल जल का स्रोत नहीं बल्कि सांस्कृतिक पहचान और ऐतिहासिक स्मृतियों का प्रतीक है।
2. सामाजिक न्याय और स्वतंत्रता: 'तीनकठिया' प्रथा के विरुद्ध चंपारण सत्याग्रह का वर्णन सामाजिक न्याय के संघर्ष को दर्शाता है। महात्मा गांधी द्वारा स्थापित आश्रम विद्यालय शिक्षा के माध्यम से सामाजिक परिवर्तन के प्रयासों का प्रतीक हैं।
3. सांस्कृतिक विविधता का सम्मान: निबंध में थारू, धाँगड़ और अन्य समुदायों की सांस्कृतिक परंपराओं का सम्मानपूर्वक वर्णन किया गया है। लेखक ने इन समुदायों की कला, जीवनशैली और योगदान को रेखांकित किया है।
4. ऐतिहासिक चेतना: नंदनगढ़ के स्तूप से लेकर राजा हरिसिंह देव तक के ऐतिहासिक स्मारकों का वर्णन इस क्षेत्र की ऐतिहासिक समृद्धि को दर्शाता है।
5. मानवीय मूल्यों का संदेश: लेखक ने "वसुंधरा भोगी मानव और धर्मांध मानव—एक ही सिक्के के दो पहलू हैं" कहकर संतुलित दृष्टिकोण का संदेश दिया है। उनका मानना है कि अति किसी भी रूप में हानिकारक है।
पाठ का शैक्षिक महत्व एवं बोर्ड परीक्षा की दृष्टि
बिहार बोर्ड कक्षा 12 हिंदी पाठ्यक्रम में 'ओ सदानीरा' का समावेश इसलिए किया गया है ताकि छात्र:
1. बिहार की सांस्कृतिक विरासत से परिचित हो सकें: चंपारण क्षेत्र की समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं को समझ सकें।
2. ऐतिहासिक घटनाओं का ज्ञान प्राप्त कर सकें: चंपारण सत्याग्रह और अन्य ऐतिहासिक घटनाओं का अध्ययन कर सकें।
3. निबंध विधा से परिचित हो सकें: यात्रा-वृत्तांत और संस्मरणात्मक निबंध की विशेषताओं को समझ सकें।
4. भाषा की समृद्धि अनुभव कर सकें: जगदीशचंद्र माथुर की प्रवाहमय और चित्रात्मक भाषा शैली से परिचित हो सकें।
बोर्ड परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण बिंदु:
• जगदीशचंद्र माथुर का जीवन परिचय और रचनाएँ
• 'सदानीरा' शब्द का अर्थ और निबंध का सारांश
• चंपारण क्षेत्र की सांस्कृतिक विशेषताएँ
• थारू और धाँगड़ समुदायों के बारे में जानकारी
• चंपारण सत्याग्रह और 'तीनकठिया' प्रथा
• गांधी जी द्वारा स्थापित आश्रम विद्यालय
• नंदनगढ़ के स्तूप और अन्य ऐतिहासिक स्मारक
• महत्वपूर्ण उद्धरण और उनकी व्याख्या
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
संपादक: प्रो. आर. के. शर्मा | अंतिम समीक्षा: जनवरी 2026 | शब्द संख्या: 2200+
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