बिहार बोर्ड कक्षा 12वीं हिन्दी के आठवें अध्याय 'उषा' (शमशेर बहादुर सिंह) के 25 अत्यंत महत्वपूर्ण वस्तुनिष्ठ प्रश्न (MCQ) यहाँ दिए गए हैं। यह कविता बिम्बप्रधान शैली में प्रभातकाल के सौंदर्य का अद्भुत चित्रण प्रस्तुत करती है।
🌅 उषाकाल के चरण: रात्रि से प्रभात तक
1. 'उषा' कविता का सारांश एवं काव्य विश्लेषण
बिहार बोर्ड कक्षा 12 हिंदी के अध्याय 8 में संकलित 'उषा' कविता हिंदी के प्रसिद्ध आधुनिक कवि शमशेर बहादुर सिंह द्वारा रचित है। यह कविता नई कविता की बिम्बप्रधान शैली का श्रेष्ठ उदाहरण है। इसमें प्रभातकाल (सुबह के समय) के सौंदर्य को अत्यंत सूक्ष्म और चित्रात्मक बिम्बों के माध्यम से प्रस्तुत किया गया है।
🎨 प्रकृति का कलात्मक चित्रण
"राख से लीपा हुआ चौका (अभी गीला पड़ा है)"
इस पंक्ति में कवि ने उषाकाल के आकाश की तुलना राख से लीपे गए गीले चौके से की है। यह एक अत्यंत सूक्ष्म बिम्ब है जो प्रभात के पहले क्षणों में आकाश की कालिमा और उसमें नमी का आभास कराता है। ऐसे ही अन्य बिम्बों के माध्यम से कवि ने प्रकृति का चित्रण किया है।
2. शमशेर बहादुर सिंह: जीवन परिचय एवं साहित्यिक विशेषताएँ
शमशेर बहादुर सिंह (13 जनवरी, 1911 - मई, 1993) हिंदी साहित्य के नई कविता आंदोलन के प्रमुख हस्ताक्षरों में से एक हैं। उनका जन्म देहरादून, उत्तराखंड में हुआ था। उन्होंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से शिक्षा प्राप्त की और अध्यापन कार्य किया। उन्हें 'कवियों के कवि' की उपाधि से विभूषित किया जाता है।
🖼️ 'उषा' कविता के प्रमुख बिम्बों का विश्लेषण
✨ शमशेर बहादुर सिंह की काव्यगत विशेषताएँ
1. बिम्बप्रधान शैली: उनकी कविताओं की सबसे बड़ी विशेषता बिम्बों का सूक्ष्म और कलात्मक प्रयोग है।
2. भाषा का संयम: वे कम शब्दों में गहन भाव व्यक्त करने में निपुण हैं।
3. दृश्यात्मकता: उनकी कविताएँ पढ़ते समय पाठक के सामने सजीव चित्र उभर आते हैं।
4. प्रकृति चित्रण: प्रकृति के सूक्ष्म और सुंदर रूपों को चित्रित करने में वे सिद्धहस्त हैं।
5. संगीतात्मकता: उनकी कविताओं में एक स्वाभाविक लय और संगीतात्मकता विद्यमान है।
3. 'उषा' कविता की साहित्यिक विशेषताएँ
- शैली: बिम्बप्रधान, चित्रात्मक, प्रतीकात्मक
- भाषा: सरल किंतु गहन अर्थपूर्ण, संयमित
- छंद: मुक्त छंद, स्वच्छंद लय
- रस: शांत रस प्रधान, अद्भुत रस का सम्मिश्रण
- अलंकार: उपमा, रूपक, प्रतीक का सहज प्रयोग
- काव्य प्रवृत्ति: नई कविता, प्रयोगवाद
📚 नई कविता में 'उषा' का स्थान
'उषा' कविता नई कविता आंदोलन का एक श्रेष्ठ उदाहरण है। नई कविता की जो विशेषताएँ हैं - बिम्बप्रधानता, प्रयोगधर्मिता, नए विषयों और शिल्प का प्रयोग, व्यक्ति की आंतरिक अनुभूतियों का चित्रण - ये सभी 'उषा' कविता में विद्यमान हैं। शमशेर बहादुर सिंह ने इस कविता के माध्यम से दिखाया है कि कैसे परंपरागत विषयों (जैसे प्रभात वर्णन) को भी नए ढंग से प्रस्तुत किया जा सकता है। यह कविता नई कविता की बिम्बवादी शैली का उत्कृष्ट नमूना है।
4. प्रमुख रचनाएँ
- काव्य-संग्रह: कुछ कविताएँ (1959), कुछ और कविताएँ (1961), चुका भी हूँ नहीं मैं (1970), इतने पास अपने (1980)
- गद्य रचनाएँ: काल तुझसे होड़ है मेरी (1978), शमशेर : एक जीवनी (1985)
- अनुवाद: पाब्लो नेरूदा की कविताओं का अनुवाद
- संपादन: तार सप्तक (1943) - सात कवियों का संकलन जिसमें शमशेर भी शामिल थे
5. 'उषा' कविता का दार्शनिक एवं प्रतीकात्मक महत्व
'उषा' कविता केवल प्रकृति वर्णन तक सीमित नहीं है, इसमें गहरा दार्शनिक और प्रतीकात्मक महत्व भी है:
🌞 प्रतीकात्मक अर्थ
1. अँधकार से प्रकाश: रात का अँधकार अज्ञान और निराशा का प्रतीक है, जबकि उषा का प्रकाश ज्ञान और आशा का प्रतीक है।
2. नवजागरण: सुबह का उजाला मानव मन में नए विचारों और चेतना के उदय का प्रतीक है।
3. परिवर्तन का नियम: रात के बाद सुबह का आना प्रकृति के परिवर्तन के नियम को दर्शाता है, जो जीवन में भी लागू होता है।
4. सौंदर्यबोध: कविता मानव मन में सौंदर्य के प्रति संवेदनशीलता जगाती है।
5. कलात्मक दृष्टि: साधारण से दृश्य को भी कलात्मक दृष्टि से देखने की प्रेरणा देती है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
• काली सिल का बिम्ब: "सिल-सी अँधेरी रात" - रात्रि के गहन अंधकार को काली सिल के रूप में चित्रित किया गया है।
• नील शंख का बिम्ब: "नील शंख के बीच चाँदी का सा" - प्रभातकाल के आकाश को नीले शंख और उसमें चाँदी की तरह चमकते सूर्य के रूप में दिखाया गया है।
• लाल केसर का बिम्ब: "लाल केसर से रँगी हुई" - उषाकाल की लालिमा को लाल केसर से रंगे हुए के रूप में प्रस्तुत किया गया है।
• नील जल का बिम्ब: "नील जल में या किसी की गौर झिलमिल देह" - प्रभात के नीले आकाश को नीले जल और उसमें झिलमिलाती गोरी देह के रूप में चित्रित किया गया है।
• भाषा: सरल, सहज, संयमित, गहन अर्थपूर्ण
• शैली: बिम्बप्रधान, चित्रात्मक, प्रतीकात्मक
• छंद: मुक्त छंद, स्वच्छंद लय
• अलंकार: उपमा, रूपक, प्रतीक का सहज प्रयोग
• विशेषता: कम शब्दों में गहन भाव व्यक्त करना, दृश्यात्मकता, संगीतात्मकता
कविता की भाषा इतनी सरल है कि सामान्य पाठक भी उसे आसानी से समझ सकता है, परंतु उसमें इतनी गहराई है कि हर बार पढ़ने पर नया अर्थ उद्घाटित होता है। शब्दों का चयन इतना सटीक है कि हर शब्द अपने पूरे अर्थ के साथ प्रस्तुत होता है।
• साहित्यिक: हिंदी साहित्य में बिम्बवादी कविताओं को समृद्ध किया, नई कविता की प्रवृत्तियों को स्थापित किया, प्रकृति वर्णन को नए ढंग से प्रस्तुत किया
• दार्शनिक: अँधकार (अज्ञान) के बाद प्रकाश (ज्ञान) के आगमन का प्रतीकात्मक चित्रण, परिवर्तन के नियम को दर्शाया, नवजागरण और नए आरंभ का संदेश दिया
• कलात्मक: कला के प्रति संवेदनशीलता जगाई, सौंदर्यबोध का विकास किया, साधारण को असाधारण रूप में देखने की दृष्टि दी
• शैक्षिक: छात्रों को बिम्बों और प्रतीकों के माध्यम से अभिव्यक्ति का तरीका सिखाया, भाषा के संयमित प्रयोग की शिक्षा दी
यह कविता सिर्फ प्रकृति वर्णन नहीं है, बल्कि मानवीय चेतना और सौंदर्यबोध का दार्शनिक दस्तावेज है।
📚 बोर्ड परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण सुझाव
उषा बिहार बोर्ड 12वीं हिंदी परीक्षा में उच्च वेटेज वाला अध्याय है। निम्न बिंदुओं पर विशेष ध्यान दें:
- कवि का परिचय: शमशेर बहादुर सिंह का जीवन परिचय, उपाधियाँ, साहित्यिक योगदान
- काव्य प्रवृत्ति: नई कविता, बिम्बवाद, प्रयोगवाद से संबंध
- प्रमुख बिम्ब: काली सिल, नील शंख, लाल केसर, नील जल आदि बिम्बों का विश्लेषण
- भाषा शैली: बिम्बप्रधान, चित्रात्मक, प्रतीकात्मक शैली
- प्रतीकात्मक अर्थ: अँधकार-प्रकाश का प्रतीकात्मक महत्व
- महत्वपूर्ण पंक्तियाँ: "राख से लीपा हुआ चौका...", "नील जल में या किसी की..." आदि
- साहित्यिक महत्व: नई कविता में इसका स्थान और योगदान
टिप: 2022 और 2023 के पेपरों में शमशेर बहादुर सिंह की उपाधि, 'उषा' कविता के बिम्बों और नई कविता से संबंधित प्रश्न पूछे गए थे। इन्हें अवश्य याद रखें।