बिहार बोर्ड कक्षा 12वीं हिन्दी के चौथे अध्याय 'छप्पय छंद' (नाभादास) के 30 अत्यंत महत्वपूर्ण वस्तुनिष्ठ प्रश्न (MCQ) यहाँ दिए गए हैं। यह अध्याय हिंदी छंद शास्त्र की महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान करता है।
छप्पय छंद की संरचना
1. 'छप्पय छंद' का सारांश एवं साहित्यिक महत्व
बिहार बोर्ड कक्षा 12 हिंदी के अध्याय 4 'छप्पय छंद' हिंदी साहित्य के छंद शास्त्र का एक महत्वपूर्ण अध्ययन है। यह अध्याय भक्तिकाल के प्रसिद्ध कवि नाभादास द्वारा रचित 'भक्तमाल' से लिए गए छप्पय छंदों पर आधारित है। छप्पय एक मात्रिक विषम छंद है जो रोला और उल्लाला छंदों के मेल से बना है।
📜 छप्पय: नामकरण और संरचना
'छप्पय' शब्द दो शब्दों से मिलकर बना है: 'छप्प' (छः) + 'अय' (चरण)। अर्थात, "छः चरणों वाला छंद"।
संरचना: पहले चार चरण रोला छंद (24 मात्राएँ) में और अंतिम दो चरण उल्लाला छंद (28 मात्राएँ) में होते हैं। इस प्रकार कुल 6 चरण और 52 मात्राएँ होती हैं।
2. नाभादास: जीवन परिचय एवं साहित्यिक योगदान
नाभादास (16वीं शताब्दी) भक्तिकाल के प्रमुख कवि थे जो सगुण रामभक्ति धारा से संबंधित थे। उनका जन्मस्थान के बारे में विवाद है - कुछ उन्हें राजस्थान का, तो कुछ उत्तर प्रदेश का मानते हैं। वे तुलसीदास के समकालीन थे और उनसे प्रभावित थे।
📖 भक्तमाल: संतों का महाकोश
भक्तमाल नाभादास की सबसे प्रसिद्ध रचना है। इसमें उन्होंने 200 से अधिक संतों और भक्तों का वर्णन किया है। यह रचना ब्रजभाषा में है और छप्पय छंद में लिखी गई है। भक्तमाल को "भक्ति साहित्य का विश्वकोश" कहा जाता है। बाद में प्रियादास ने भक्तमाल पर 'भक्तमाल की टीका' लिखी जो और भी प्रसिद्ध हुई।
🎭 छप्पय छंद की काव्यात्मक विशेषताएँ
1. लयात्मकता: छप्पय में स्वाभाविक लय और संगीतात्मकता होती है।
2. गेयता: यह छंद गाने के लिए उपयुक्त है।
3. भावाभिव्यक्ति: संतों के यशगान के लिए उत्तम माध्यम।
4. संक्षिप्तता: कम शब्दों में गहन भाव व्यक्त करना।
5. प्रभावशीलता: श्रोता/पाठक पर गहरा प्रभाव डालने की क्षमता।
3. छप्पय छंद का ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक महत्व
- भक्ति आंदोलन का दस्तावेज: छप्पय छंद भक्ति आंदोलन का ऐतिहासिक दस्तावेज है।
- संत परंपरा का संरक्षण: इसने संतों की जीवनियों और शिक्षाओं को संरक्षित किया।
- सामाजिक समरसता: विभिन्न जाति और वर्ग के संतों का समान रूप से यशगान।
- सांस्कृतिक एकता: पूरे भारत के संतों का वर्णन करके सांस्कृतिक एकता को दर्शाया।
- भाषाई विकास: ब्रजभाषा के विकास में महत्वपूर्ण योगदान।
4. छप्पय छंद का बोर्ड परीक्षा परिप्रेक्ष्य
बिहार बोर्ड कक्षा 12 हिंदी परीक्षा में 'छप्पय छंद' से निम्न प्रकार के प्रश्न पूछे जाते हैं:
📚 परीक्षा में पूछे जाने वाले प्रश्नों के प्रकार
1. संरचनात्मक प्रश्न:
• छप्पय में कितने चरण होते हैं?
• छप्पय किन छंदों के मेल से बना है?
• छप्पय में कुल कितनी मात्राएँ होती हैं?
2. साहित्यिक प्रश्न:
• छप्पय का प्रमुख उद्देश्य क्या है?
• छप्पय किस काव्य-काल से संबंधित है?
• छप्पय में प्रयुक्त भाषा कौन-सी है?
3. रचनाकार संबंधी प्रश्न:
• छप्पय छंद का संबंध किस कृति से है?
• नाभादास की प्रसिद्ध रचना कौन-सी है?
• नाभादास किस भक्ति धारा से संबंधित हैं?
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
• कुल चरण: 6
• मात्रा संख्या: 52 (रोला: 24 + उल्लाला: 28)
• छंद संयोजन: रोला (पहले 4 चरण) + उल्लाला (अंतिम 2 चरण)
• मात्रा विन्यास: रोला: 11, 13 और उल्लाला: 15, 13
• यति/विराम: रोला में द्वितीय चरण के बाद और उल्लाला में प्रथम चरण के बाद
1. इसका प्रयोग मुख्यतः भक्ति काव्य में हुआ है।
2. इसके प्रमुख प्रयोक्ता भक्त कवि (नाभादास) थे।
3. इसका मुख्य विषय संतों का यशगान और भक्ति है।
4. यह ब्रजभाषा में लिखा गया है जो भक्तिकाल की मुख्य साहित्यिक भाषा थी।
5. इसका उद्देश्य लोकमंगल और आध्यात्मिक उन्नति है जो भक्तिकाल की मूल भावना है।
• भाषा: ब्रजभाषा प्रधान, सरल और प्रवाहमयी
• शैली: यशगानात्मक, भक्तिपूर्ण और लयात्मक
• अलंकार: उपमा, रूपक, अनुप्रास आदि का सहज प्रयोग
• लय: स्वाभाविक लय और संगीतात्मकता
• भावाभिव्यक्ति: संक्षिप्त किन्तु प्रभावशाली ढंग से भाव व्यक्त करना
• साहित्यिक: हिंदी छंद शास्त्र को समृद्ध किया, भक्ति काव्य की एक नई विधा विकसित की
• धार्मिक: भक्ति आंदोलन को बल दिया, संत परंपरा का प्रचार-प्रसार किया
• सांस्कृतिक: सामाजिक समरसता को बढ़ावा दिया, विभिन्न क्षेत्रों के संतों को एक मंच पर प्रस्तुत किया
• शैक्षिक: संतों के आदर्श जीवन से शिक्षा दी, नैतिक मूल्यों का प्रसार किया
• ऐतिहासिक: भक्ति आंदोलन का ऐतिहासिक दस्तावेज तैयार किया
📚 बोर्ड परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण सुझाव
छप्पय छंद बिहार बोर्ड 12वीं हिंदी परीक्षा में मध्यम वेटेज वाला अध्याय है। निम्न बिंदुओं पर विशेष ध्यान दें:
- छप्पय की संरचना: चरणों की संख्या, मात्राओं की संख्या, छंदों का संयोजन
- नाभादास का परिचय: उनकी प्रमुख रचना, भक्ति धारा, ऐतिहासिक संदर्भ
- भक्तमाल: विषय वस्तु, भाषा, महत्व
- छप्पय का उद्देश्य: यशगान, भक्ति प्रसार, लोकमंगल
- साहित्यिक विशेषताएँ: भाषा शैली, अलंकार, लय, भावाभिव्यक्ति
- ऐतिहासिक संदर्भ: भक्तिकाल से संबंध, समकालीन कवि
टिप: 2023 और 2024 के पेपरों में छप्पय के चरणों की संख्या, नाभादास की रचना और छप्पय के उद्देश्य से संबंधित प्रश्न पूछे गए थे। इन्हें अवश्य याद रखें।