एक लेख और एक पत्र (भगत सिंह) – वस्तुनिष्ठ प्रश्न
BSEB Class 12 Hindi Chapter 6
बिहार बोर्ड कक्षा 12वीं हिन्दी के अध्याय 6 'एक लेख और एक पत्र' (शहीद भगत सिंह) के सभी महत्वपूर्ण वस्तुनिष्ठ प्रश्न यहाँ दिए गए हैं।
एक लेख और एक पत्र: पाठ का विस्तृत विश्लेषण एवं ऐतिहासिक महत्व
बिहार बोर्ड कक्षा 12 हिंदी पाठ्यक्रम का अध्याय 6 'एक लेख और एक पत्र' भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के महान क्रांतिकारी शहीद भगत सिंह के विचारों और दर्शन को प्रस्तुत करता है। यह पाठ दरअसल दो भागों में विभाजित है - एक लेख 'विद्यार्थी और राजनीति' और एक पत्र जो भगत सिंह ने अपने साथी क्रांतिकारी सुखदेव को लिखा था।
लेख: 'विद्यार्थी और राजनीति' - इस लेख में भगत सिंह ने विद्यार्थियों की भूमिका और राजनीति में उनकी भागीदारी के महत्व पर प्रकाश डाला है। उनका मानना था कि विद्यार्थियों को केवल पाठ्यपुस्तकों तक सीमित न रहकर देश की राजनीतिक परिस्थितियों से अवगत होना चाहिए।
पत्र: सुखदेव को लिखा गया पत्र - यह पत्र भगत सिंह ने लाहौर जेल में बंदी के रूप में रहते हुए अपने साथी क्रांतिकारी सुखदेव को लिखा था। इसमें उन्होंने क्रांतिकारी आंदोलन, देशप्रेम, और व्यक्तिगत संबंधों के बारे में अपने विचार व्यक्त किए हैं।
ऐतिहासिक संदर्भ: यह पाठ 1920-30 के दशक के भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन की उस चरम अवस्था को दर्शाता है जब युवा क्रांतिकारी ब्रिटिश साम्राज्यवाद के खिलाफ सशस्त्र संघर्ष का मार्ग अपना रहे थे। भगत सिंह उस समय के प्रमुख युवा नेता थे जिनके विचार आज भी प्रासंगिक हैं।
"जब देश के भाग्य का निर्णय हो रहा हो, तब मैं कैसे चुप रह सकता हूँ?"
भगत सिंह: व्यक्तित्व एवं क्रांतिकारी यात्रा
प्रारंभिक जीवन: भगत सिंह का जन्म 28 सितंबर 1907 को पंजाब के लायलपुर जिले (अब पाकिस्तान में) के बंगा गाँव में हुआ था। उनके पिता किशन सिंह और माता विद्यावती थीं। उनके चाचा अजीत सिंह भी एक स्वतंत्रता सेनानी थे जिनका भगत सिंह के जीवन पर गहरा प्रभाव था।
क्रांतिकारी जीवन की शुरुआत: 1919 के जालियाँवाला बाग हत्याकांड ने मात्र 12 वर्ष की आय्र में ही भगत सिंह के मन में क्रांति की ज्वाला जला दी। उन्होंने जालियाँवाला बाग की मिट्टी लेकर क्रांतिकारी मार्ग अपनाने की शपथ ली। 1926 में उन्होंने 'नौजवान भारत सभा' की स्थापना की जो युवाओं को क्रांतिकारी गतिविधियों के लिए संगठित करती थी।
शैक्षिक पृष्ठभूमि: भगत सिंह ने प्रारंभिक शिक्षा गाँव में ही प्राप्त की। बाद में उन्होंने लाहौर के डी.ए.वी. स्कूल और नेशनल कॉलेज में शिक्षा प्राप्त की। कॉलेज में उनकी मुलाकात सुखदेव और भगवती चरण वोहरा जैसे क्रांतिकारियों से हुई जिनका उनके जीवन पर गहरा प्रभाव पड़ा।
पत्रकारिता में योगदान: भगत सिंह गणेश शंकर विद्यार्थी के समाचार पत्र 'प्रताप' में कार्य करते थे जहाँ उन्होंने 'बलवंत' उपनाम से लेख लिखे। उनके लेखन में देशप्रेम, सामाजिक न्याय और क्रांतिकारी विचारधारा स्पष्ट झलकती है।
प्रमुख ऐतिहासिक घटनाएँ एवं क्रांतिकारी गतिविधियाँ
1. सांडर्स हत्याकांड (1928): लाला लाजपत राय की मृत्यु का बदला लेने के लिए भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव ने ब्रिटिश पुलिस अधिकारी जे.पी. सांडर्स की हत्या की। इस घटना ने उन्हें ब्रिटिश सरकार के लिए सबसे बड़ा खतरा बना दिया।
2. असेंबली बम कांड (1929): भगत सिंह और बटुकेश्वर दत्त ने 8 अप्रैल 1929 को दिल्ली की केंद्रीय विधानसभा में बम फेंका। उनका उद्देश्य किसी को नुकसान पहुँचाना नहीं बल्कि 'बहरों को सुनाना' था। उन्होंने 'इन्कलाब ज़िंदाबाद' के नारे लगाए और गिरफ्तारी दी।
3. लाहौर षडयंत्र केस (1929-31): भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव पर सांडर्स हत्याकांड का मुकदमा चलाया गया। इस केस ने पूरे देश का ध्यान खींचा और भगत सिंह को राष्ट्रीय नायक बना दिया।
4. जेल में अनशन और लेखन: जेल में रहते हुए भगत सिंह ने कई महत्वपूर्ण लेख लिखे। उन्होंने जेल सुधारों के लिए अनशन किया और कैदियों के अधिकारों के लिए संघर्ष किया।
5. शहादत (23 मार्च 1931): भगत सिंह को राजगुरु और सुखदेव के साथ लाहौर सेंट्रल जेल में फाँसी दे दी गई। उनकी शहादत ने पूरे देश में एक नया जोश भर दिया और स्वतंत्रता आंदोलन को नई दिशा दी।
• धर्मनिरपेक्षता एवं वैज्ञानिक दृष्टिकोण
• नास्तिकता पर लेखन ("मैं नास्तिक क्यों हूँ?")
• साम्राज्यवाद विरोधी संघर्ष
• युवाओं की राजनीतिक शिक्षा पर जोर
भगत सिंह का साहित्यिक योगदान एवं लेखन शैली
भगत सिंह केवल एक क्रांतिकारी ही नहीं बल्कि एक गहन चिंतक और लेखक भी थे। उन्होंने अपने छोटे से जीवनकाल में कई महत्वपूर्ण लेख, पत्र और निबंध लिखे जो आज भी प्रासंगिक हैं।
प्रमुख रचनाएँ:
• 'विद्यार्थी और राजनीति' - युवाओं की राजनीतिक भूमिका पर निबंध
• 'मैं नास्तिक क्यों हूँ?' - धर्म और आस्तिकता पर चिंतन
• 'जेल डायरी' - जेल में लिखे गए विचार और अनुभव
• 'पंजाब की भाषा तथा लिपि की समस्या' - भाषाई मुद्दों पर लेख
• 'करतार सिंह सराभा' - गदर पार्टी के क्रांतिकारी पर लेख
• 'प्रिंस क्रोपोटकिन' - रूसी क्रांतिकारी और अराजकतावादी विचारक पर लेख
लेखन शैली: भगत सिंह की भाषा-शैली स्पष्ट, तार्किक और प्रभावशाली है। उनके लेखन में तथ्यों का विश्लेषण, ऐतिहासिक संदर्भ और दार्शनिक गहराई स्पष्ट दिखाई देती है। वे जटिल विचारों को भी सरल भाषा में प्रस्तुत करने में सक्षम थे।
भाषाई दक्षता: भगत सिंह को हिंदी, उर्दू, पंजाबी और अंग्रेजी भाषाओं पर अच्छी पकड़ थी। उन्होंने अंग्रेजी में भी कई लेख लिखे और मार्क्स, लेनिन, क्रोपोटकिन जैसे विचारकों के ग्रंथों का गहन अध्ययन किया था।
पाठ का शैक्षिक महत्व एवं बोर्ड परीक्षा की दृष्टि
बिहार बोर्ड कक्षा 12 हिंदी पाठ्यक्रम में 'एक लेख और एक पत्र' का समावेश इसलिए किया गया है ताकि छात्र:
1. ऐतिहासिक संदर्भ समझ सकें: भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के क्रांतिकारी चरण का अध्ययन कर सकें।
2. भगत सिंह के विचारों से परिचित हो सकें: एक क्रांतिकारी के साथ-साथ एक चिंतक और लेखक के रूप में भगत सिंह को जान सकें।
3. देशप्रेम और राष्ट्रनिर्माण की भावना विकसित कर सकें: भगत सिंह के त्याग और बलिदान से प्रेरणा ले सकें।
4. हिंदी गद्य साहित्य की विविधता समझ सकें: पत्र और लेख जैसी गद्य विधाओं से परिचित हो सकें।
बोर्ड परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण बिंदु:
• भगत सिंह का जीवन परिचय (जन्म, शहादत, परिवार)
• पाठ का सारांश और मुख्य विचार
• भगत सिंह के प्रमुख लेख और पत्र
• ऐतिहासिक घटनाएँ (सांडर्स हत्याकांड, असेंबली बम कांड)
• भगत सिंह का राजनीतिक और सामाजिक दर्शन
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
संपादक: प्रो. आर. के. शर्मा | अंतिम समीक्षा: जनवरी 2026 | शब्द संख्या: 2000+
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